Republic Day Speeches (Bhasan) for School Students in Hindi

Republic Day Speeches for School Students in Hindi

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Republic Day Hindi Bhasan : बाल मजदूरी
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों मैं आप लोगों के सामने के बारे बाल मजदूरी के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। 5 से 14 साल तक के बच्चों का अपने बचपन से ही नियमित काम करना बाल मजदूरी कहलाता है। विकासशील देशों मे बच्चे जीवन जीने के लिये बेहद कम पैसों पर अपनी इच्छा के विरुद्ध जाकर पूरे दिन कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर है। वो स्कूल जाना चाहते है, अपने दोस्तों के साथ खेलना चाहते है और दूसरे अमीर बच्चों की तरह अपने माता-पिता का प्यार और परवरिश पाना चाहते है लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें अपनी हर इच्छाओं का गला घोंटना पड़ता है।

अपने देश के लिये सबसे जरुरी संपत्ति के रुप में बच्चों को संरक्षित किया जाता है जबकि इनके माता-पिता की गलत समझ और गरीबी की वजह से बच्चे देश की शक्ति बनने के बजाए देश की कमजोरी का कारण बन रहे है। बच्चों के कल्याण के लिये कल्याकारी समाज और सरकार की ओर से बहुत सारे जागरुकता अभियान चलाने के बावजूद गरीबी रेखा से नीचे के ज्यादातर बच्चे रोज बाल मजदूरी करने के लिये मजबूर होते है।

बाल मजदूरी एक वैशविक समस्या है जो विकासशील देशों में बेहद आम है। माता-पिता या गरीबी रेखा से नीचे के लोग अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर पाते है और जीवन-यापन के लिये भी जरुरी पैसा भी नहीं कमा पाते है। इसी वजह से वो अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाए कठिन श्रम में शामिल कर लेते है। वो मानते है कि बच्चों को स्कूल भेजना समय की बरबादी है और कम उम्र में पैसा कमाना परिवार के लिये अच्छा होता है। बाल मजदूरी के बुरे प्रभावों से गरीब के साथ-साथ अमीर लोगों को भी तुरंत अवगत कराने की जरुरत है। उन्हें हर तरह की संसाधनों की उपलब्ता करानी चाहिये जिसकी उन्हें कमी है। अमीरों को गरीबों की मदद करनी चाहिए जिससे उनके बच्चे सभी जरुरी चीजें अपने बचपन में पा सके। इसको जड़ से मिटाने के लिये सरकार को कड़े नियम-कानून बनाने चाहिए। जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : भारत का राष्ट्रीय ध्वज
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों मैं आप लोगों के सामने के बारे ‘भारत का राष्ट्रीय ध्वज’ के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। ‘भारत का राष्ट्रीय ध्वज’ तिरंगा है। इसमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफ़ेद व सबसे नीचे हरा रंग है। सभी रंग बराबर अनुपात में हैं। सफ़ेद रंग की पट्टी पर झंडे के मध्य में नीले रंग का चक्र है जिसमें 24 तीलियाँ हैं।

केसरिया रंग देश की ताकत एवं साहस का परिचायक है। बीच में सफ़ेद रंग की पट्टी शांति एवं सत्यता को दर्शाती है। हरे रंग की पट्टी धरती की उर्वरता, विकास एवं पवित्रता की परिचायक है। चक्र इस बात को दर्शित करता है कि जीवन गतिमान है जबकि मृत्यु निश्चलता का नाम है। झंडे की लंबाई व चौड़ाई का अनुपात 3:2 है। चक्र का व्यास सफ़ेद पट्टी की चौड़ाई के लगभग बराबर होता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के वर्तमान रूप को भारत की संविधानकारी सभा द्वारा 22 जुलाई 1947 को अंगीकृत किया गया था।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : भारत का राष्ट्रीय पक्षी
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने के बारे ‘भारत का राष्ट्रीय पक्षी’ के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। ‘भारत का राष्ट्रीय पक्षी’ मोर है। यह एक बड़ा पक्षी है एवं इसके आकर्षक रंगीन पंख काफी लम्बे होते हैं। मोर के सर पर मुकुट जैसी खूबसूरत कलंगी होती है। इसकी लम्बी गर्दन पर सुन्दर नीला मखमली रंग होता है। यह भारत के सभी क्षेत्रों में पाया जाता है।मोर नुकसानदायक कीट-पतंगों को खाता है और इसलिए यह किसानों का अच्छा मित्र होता है। मोर शब्द पुल्लिंग है तथा स्त्रीलिंग को मोरनी कहते हैं। मोर का नृत्य बहुत प्रसिद्द है। मयूर नृत्य समूह में किया जाता है। नृत्य के समय मोर अपने पंख फैला कर बडा सुन्दर मगर धीमी गति का नृत्य करता है।
मोर का शिकार भारत में पूर्णतया प्रतिबंधित है। इसे भारतीय वन्य-जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत पूर्ण संरक्षण दिया गया है। जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : मधुर वाणी का महत्व

आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने मधुर वाणी का महत्व के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। वाणी मनुष्य को ईश्वर की अनुपम देन है। मनुष्य का भाषा पर विशेष अधिकार है। भाषा के कारण ही मनुष्य इतनी उन्नति कर सका है। हमारी वाणी में मधुरता का जितना अधिक अंश होगा हम उतने ही दूसरों के प्रिय बन सकते हैं। हमारी बोली में माधुर्य के साथ-साथ शिष्टता भी होनी चाहिए।

मधुर वाणी मनोनुकूल होती है जो कानों में पड़ने पर चित्त द्रवित हो उठता है। वाणी की मधुरता ह्रदय-द्वार खोलने की कुंजी है। एक ही बात को हम कटु शब्दों में कहते हैं और उसी को हम मधुर बना सकते हैं। वार्तालाप की शिष्टता मनुष्य को आदर का पात्र बनाती है और समाज में उसकी सफलता के लिए रास्ता साफ़ कर देती है। कटु वाणी आदमी को रुष्ट कर सकती है तो इसके विपरीत मधुर वाणी दूसरे को प्रसन्न भी कर सकती है।

हमारी वाणी ही हमारी शिक्षा-दीक्षा, कुल की परंपरा और मर्यादा का परिचय देती है। इसलिए हमें वार्तालाप में व्यापारिक बातचीत एवं निजी बातचीत में थोडा अंतर रखना चाहिए। वाणी किसी भी स्थिति में कटु एवं अशिष्ट नहीं होनी चाहिए।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : गांधीवाद

आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने गांधीवाद के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। महात्मा गांधी के आदर्शों, विश्वासों एवं दर्शन से उदभूत विचारों के संग्रह को ‘गांधीवाद’ कहा जाता है। महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे बडे राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेताओं में से थे। गांधीवाद उन सभी विचारों का एक समेकित रूप है जो गांधीजी ने जीवन पर्यंत जिया एवं किया था।

गांधीवाद के बुनियादी तत्वों में से सत्य सर्वोपरि है। सत्य ही किसी भी राजनैतिक संस्था, सामाजिक संस्थान इत्यादि की धुरी होनी चाहिए। सत्य, अहिंसा, मानवीय स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय पर उनकी निष्ठा को उनकी निजी जिंदगी के उदाहरणों से बखूबी समझा जा सकता है।

गांधीवाद में राजनीतिक और आध्यात्मिक तत्वों का समन्वय मिलता है। यही इस वाद की विशेषता है। आज संसार में जितने भी वाद प्रचलित हैं वह प्रायः राजनीतिक क्षेत्र में सीमित हो चुके हैं। आत्मा से उनका सम्बन्ध-विच्छेद होकर केवल बाह्य संसार तक उनका प्रसार रह गया है।

मन की निर्मलता और ईश्वर-निष्ठां से आत्मा को शुद्ध करना गांधीवाद की प्रथम आवश्यकता है। ऐसा करने से निःस्वार्थ बुद्धि का विकास होता है और मनुष्य सच्चे अर्थों में जन-सेवा के लिए तत्पर हो जाता है। गांधीवाद में सांप्रदायिकता के लिए कोई स्थान नहीं है। इसी समस्या को हल करने के लिए गांधी जी ने अपने जीवन का बलिदान दिया था।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : सड़क दुर्घटना

आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने सड़क दुर्घटना के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। बड़े-बड़े शहरों में सड़क दुर्घटना आम बात है। सडकों पर हर समय अत्यधिक भीड़ होती है। ट्रक, बस, मोटरकार, स्कूटर, मोटरसाइकिल इत्यादि सड़कों पर तेज़ रफ़्तार से दौड़ती रहती हैं। सभी लोग जल्दी में दिखाई देते हैं।

एक दिन एक सड़क दुर्घटना मेरे सामने भी हुई। मैं सड़क किनारे बने फुटपाथ पर जा रही थी। एक बस सड़क पर सामने से आ रही थी, तभी किनारे वाली सड़क से एक मोटरसाइकिल गलत दिशा से मुड़ी। मोटरसाइकिल अत्यधिक तेज़ रफ़्तार से चल रही थी। बस के सामने पहुंचकर मोटरसाइकिल सवार अपना संतुलन ना संभाल सका तथा तेज़ रफ़्तार से बस के किनारे हिस्से से टकरा गया। मोटरसाइकिल सवार मोटरसाइकिल से छिटककर अलग गिर गया तथा उसके सिर से खून बहने लगा।

धीरे-धीरे उस स्थान पर भीड़ इकट्ठा हो गई। कुछ लोग बस चालक को और कुछ लोग मोटरसाइकिल चालक को दोष देने लगे। कुछ देर में एक पुलिस दरोगा , कांस्टेबिल के साथ आया तथा बस चालक व उपस्थित कुछ लोगों के बयान दर्ज़ किये और मोटरसिकलर चालक को अस्पताल पहुंचवाया।

इस प्रकार की सड़क दुर्घटना से हमें सबक लेना चाहिए कि हमें सड़क पर अत्यंत सावधानी से चलना चाहिए।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : स्वास्थ्य ही धन है

आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने स्वास्थ्य के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। एक बड़ी पुरानी कहावत है – ‘स्वास्थ्य ही धन है’। व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य ही अधिक मूल्यवान होता है। जिस व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा होता है उस व्यक्ति का मस्तिष्क, सोचने-समझने की क्षमता तथा कार्य के प्रति निष्ठा सही होती है और तभी वह व्यक्ति किसी भी कार्य को करने में सफलता प्राप्त कर पाता है।

स्वस्थ जीवन ही सफलता प्राप्त करने की कुंजी है। किन्तु अक्सर देखा जाता है कि कम उम्र में ही व्यक्ति न जाने कितनी बीमारियो से ग्रसित हो जाते है। इसका मुख्य कारण होता है व्यक्ति के जीवन में नियमित सही दिनचर्या का न होना। यदि हम अपनी नियमित दिनचर्या में प्राणायाम और योग और ध्यान को शामिल कर लें तो हमारा स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है।

जीवन में स्वास्थ्य ही अनमोल धन है। शारीरिक रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति ही जीवन के विभिन्न क्षेत्रो में सफलता अर्जित कर सकते है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है। व्यक्ति की सबसे बड़ी दौलत उसका शरीर और उसका स्वास्थ्य होता है। जीवन में स्वास्थ्य का मूल्य समझ कर ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना की गई थी। अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : संस्कृति और सभ्यता

आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने संस्कृति और सभ्यता के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। ‘संस्कृति’ मनुष्य का वह गुण है जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है। संस्कृति से मनुष्य दया, माया और परोपकार सीखता है। संस्कृति से मनुष्य गीत, कविता, चित्र और मूर्ति से आनंद लेने की योगयता हासिल करता है। ‘सभ्यता’ मनुष्य का वह गुण है जिससे वह अपनी बाहरी तरक्की करता है। संस्कृति और सभ्यता यह दोनों दो शब्द हैं और उनके मायने भी अलग-अलग हैं।

आज भी रेलगाड़ी, मोटर और हवाई जहाज, लम्बी-चौड़ी सड़कें, बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन, अच्छी पोशाक, ये सभी सभ्यता की पहचान हैं। किन्तु, संस्कृति इन सबसे कहीं अलग है। यह कहना कदापि उचित नहीं है कि प्रत्येक सभ्य मनुष्य सुसंस्कृत मनुष्य भी है। संस्कृति धन नहीं गुण है।

संस्कृति वह गुण है जो हममें छिपा हुआ है जबकि सभ्यता वह गुण है जो हमारे पास है। उदाहरण के तौर पर मकान बनाना सभ्यता का काम है, किन्तु हम मकान का कौन सा नक्शा पसंद करते हैं, यह हमारी संस्कृति बतलाती है।

संस्कृति का काम मनुष्य के दोष को कम करना एवं उसके गुण को अधिक बनाना है। संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान-प्रदान से बढ़ती है। वर्त्तमान समय में सभ्यता तो विकसित होती जा रही है किन्तु संस्कृति लुप्त होती जा रही है। इसे पुनर्जीवित एवं विकसित करने की आवश्यकता है।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : स्वच्छ भारत अभियान
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने स्वच्छ भारत अभियान के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। इंडिया जोकि भारत है, एक प्राचीन सभ्यता है। इसे एक पवित्र राष्ट्र माना जाता है, इसके लोग बहुत धार्मिक है। भारत में विभिन्न धर्मों के लोग रहते है; हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख, पारसी, जैन आदि और वे अपने धर्मों का पूरी निष्ठा से पालन करते है। लेकिन यह हमारे देश की कड़वी सच्चाई है कि सभी स्वच्छता और धर्मपरायणता केवल धार्मिक गतिविधियों और रसोई तक ही सीमित है। हम भारतीय अपने हर तरफ की गंदगी के लिये गंभीर नहीं है, कहीं भी कोई गंदगी का ढ़ेर देख सकता है। अपने आस-पास के वातावरण को साफ और स्वच्छ रखना हमारे व्यवहार में नहीं है। अधिक से अधिक हम अपने घर को साफ रखते है और सड़क, रास्ते, पार्क या सार्वजनिक जगहों के प्रति हम चिंतित हो ये हमारा मसला नहीं है। यहाँ तक कि आजादी के 65 साल बाद भी ये सच में शर्मनाक है कि भारतीय अपने अस्वास्थ्यकर व्यवहार के लिये प्रसिद्ध है।

स्वच्छ भारत आंदोलन की मुहिम आज तक स्वच्छता से संबंधित लिया गया एक बड़ा कदम है। इस अभियान को विश्वस्तर पर प्रसिद्ध करने के लिये तथा आम जनता को इसके प्रति जागरुक करने के लिये स्कूलों तथा कॉलेज के विद्यार्थीयों सहित लगभग 3 लाख सरकारी कर्मचारीयों ने इसके प्रारंभ होने के दिन इसमें भाग लिया। 1500 लोगों के मौजूदगी में 2 अक्टूबर 2014 को राष्ट्रपति भवन में इस कार्यक्रम को आयोजित किया गया था। भारतीय राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने झंडा दिखाकर इस आंदोलन की शुरुआत की।

इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिये व्यापार, खेल और फिल्म उद्योग से जुड़े नौ प्रसिद्ध व्यक्तियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामित किया। उन्होंने उन नौ व्यक्तियों से निवेदन भी किया कि वे और नौ व्यक्तियों को इस अभियान से जोड़ें और स्वच्छता के इस आंदोलन को देश के कोने-कोने में रहने वाले हर एक भारतीय तक इसे पहुचाऐ।

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस मुहिम को चुनौती की तरह लेना चाहिये तथा व्यक्तिगत (पेड़ की शाखाओं की तरह) तौर पर दूसरे नौ लोगों को आमंत्रित करना चाहिये जिससे स्वच्छता का ये दृष्टीकोण 2019 तक पूरा हो जाए और इतिहास में हमेशा के लिये भारत एक स्वच्छ देश बने। जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : स्वच्छता
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने स्वच्छता के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। स्वच्छता एक अच्छी आदत है जो हम सभी के लिये बहुत जरुरी है। अपने घर, पालतू जानवर, अपने आस-पास, पर्यावरण, तालाब, नदी, स्कूल आदि सहित स्वच्छता एक आदत है खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वच्छ रखने की। हमें हर समय अपने आपको शुद्ध, स्वच्छ और अच्छे से कपड़े पहन कर रहना चाहिये। ये समाज में अच्छे व्यक्तित्व और प्रभाव को बनाने में मदद करता है क्योंकि ये आपके अच्छे चरित्र को दिखाता है। धरती पर हमेशा के लिये जीवन को संभव बनाने के लिये अपने शरीर की सफाई के साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को भी बनाए रखना चाहिये।

स्वच्छता हमें मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और बौद्धिक हर तरीके से स्वस्थ बनाता है। सामान्यत:, हमने हमेशा अपने घर में ये ध्यान दिया है कि हमारी दादी और माँ पूजा से पहले स्वच्छता को लेकर बहुत सख्त होती है, ये कोई अलग बात नहीं है, वो बस साफ-सफाई को हमारी आदत बनाना चाहती है। लेकिन वो गलत तरीका अपनाती है क्योंकि वो स्वच्छता के उद्देश्य और फायदे को नहीं बताती है इसी वजह से हमें स्वच्छता का अनुसरण करने में समस्या आती है। हर अभिवावक को तार्किक रुप से स्वच्छता के उद्देश्य, फायदे और जरुरत आदि के बारे में अपने बच्चों से बात करनी चाहिये।

अपने भविष्य को चमकदार और स्वस्थ बनाने के लिये हमें हमेशा खुद का और अपने आसपास के पर्यावरण का ख्याल रखना चाहिये। हमे साबुन से नहाना, नाखुनों को काटना, साफ और इस्त्री किये हुए कपड़े आदि कार्य रोज करना चाहिये। घर को कैसे स्वच्छ और शुद्ध बनाए ये हमें अपने माता-पिता से सीखना चाहिये। हमें अपने आसपास के वातावरण को साफ रखना चाहिये ताकि किसी प्रकार की बीमारी न फैले। कुछ खाने से पहले और खाने के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिये। जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : महिला सशक्तिकरण
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने महिला सशक्तिकरण के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। नारी सशक्तिकरण के नारे के साथ एक प्रश्न उठता है कि “क्या महिलाएँ सचमुच में मजबूत बनी है” और “क्या उसका लंबे समय का संघर्ष खत्म हो चुका है”। राष्ट्र के विकास में महिलाओं की सच्ची महत्ता और अधिकार के बारे में समाज में जागरुकता लाने के लिये मातृ दिवस, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आदि जैसे कई सारे कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाये जा रहे और लागू किये गये है। महिलाओं को कई क्षेत्र में विकास की जरुरत है। अपने देश में उच्च स्तर की लैंगिक असमानता है जहाँ महिलाएँ अपने परिवार के साथ ही बाहरी समाज के भी बुरे बर्ताव से पीड़ित है। भारत में अनपढ़ो की संख्या में महिलाएँ सबसे अव्वल है। नारी सशक्तिकरण का असली अर्थ तब समझ में आयेगा जब भारत में उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें इस काबिल बनाया जाएगा कि वो हर क्षेत्र में स्वतंत्र होकर फैसले कर सकें।
भारत में महिलाएँ हमेशा परिवार में कलंक से बचाने हेतु किये गये वध के विषय के रुप में होती है और उचित शिक्षा और आजादी के लिये उनको कभी भी मूल अधिकार नहीं दिये गये। भारतीय सरकार के द्वारा शुरुआत की गयी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये राष्ट्रीय मिशन के अनुसार 2011 गणना में इस कदम की वजह से कुछ सुधार आया। इससे महिला लिगांनुपात और महिला शिक्षा दोनों में बढ़ौतरी हुई। वैश्विक लिंग गैप सूचकांक के अनुसार, आर्थिक भागीदारी, उच्च शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के द्वारा समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिये भारत में कुछ ठोस कदम की जरुरत है। जरुरत है कि इसे आरम्भिक स्थिति से निकालते हुए सही दिशा में तेज गति से आगे बढ़ाया जाये। जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : पर्यावरण
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने पर्यावरण के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। पर्यावरण का मतलब है सभी प्राकृतिक परिवेश जैसे की भूमि, वायु, जल, पौधें, पशु, ठोस सामग्री, कचरा, धूप, जंगल और अन्य वस्तु। स्वस्थ वातावरण प्रकृति के संतुलन को बनाए रखता है और साथ ही साथ पृथ्वी पर सभी जीवित चीजों को बढ़ने, पोषित और विकसित करने में मदद करता है। हालांकि अब कुछ तकनीकी उन्नति परिणाम स्वरुप मानव निर्मित चीजे वातावरण को कई प्रकार से विकृत कर रहीं हैं जोकि अंततः प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रही है। हम अपने जीवन को साथ ही साथ इस ग्रह पर भविष्य में जीवन के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं|

यदि हम प्रकृति के अनुशासन के खिलाफ गलत तरीके से कुछ भी करते हैं तो ये पूरे वातावरण के माहौल जैसे की वायु-मंडल, जलमंडल और स्थलमंडल को अस्तव्यस्त करती है। प्राकृतिक वातावरण के अलावा, मानव निर्मित वातावरण भी मौजूद है जो की प्रौद्योगिकी, काम के माहौल, सौंदर्यशास्त्र, परिवहन, आवास, सुविधाएं और शहरीकरण के साथ सम्बंधित है| मानव निर्मित वातावरण काफी हद तक प्राकृतिक वातावरण को प्रभावित करता है जिसे हम सभी एकजुट होकर बचा सकते हैं|

प्राकृतिक वातावरण के घटक संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है हालाँकि कुछ बुनियादी भौतिक जरूरतों और जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इंसान द्वारा इसका शोषण किया जाता है| हमें हमारे प्राकृतिक संसाधनों को चुनौती नहीं देनी चाहिए और पर्यावरण में इतना प्रदूषण या अपशिष्ट डालने में रोक लगानी चाहिए। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों को महत्व देना चाहिए और प्राकृतिक अनुशासन के तहत उन्हें इस्तेमाल करना चाहिए।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : ग्लोबल वार्मिंग
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। धरती के तापमान में लगातार बढ़ते स्तर को ग्लोबल वार्मिंग कहते है। वर्तमान में ये पूरे विश्व के समक्ष बड़ी समस्या के रुप में उभर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि धरती के वातावरण के गर्म होने का मुख्य कारण का ग्रीनहाउस गैसों के स्तर में वृद्धि है। अगर इसे नजरअंदाज किया गया और इससे निजात पाने के लिये पूरे विश्व के देशों द्वारा तुरंत कोई कदम नहीं उठाया गया तो वो दिन दूर नहीं जब धरती अपने अंत की ओर अग्रसर हो जाएगी।

दिनों-दिन बढ़ते इसके खतरनाक प्रभाव से संपूर्ण विश्व के लिये खतरा उत्पन्न हो रहा है। इससे समुद्र जल स्तर में वृद्धि, बाढ़, तूफान, चक्रवात, मौसम के स्वरुपों में परिवर्तन, संक्रामक बीमारीयाँ, खाद्य कमी, मौतें आदि आने वाले समय में दिखाई देंगी। इससे निजात पाने का एक ही तरीका है व्यक्तिगत स्तर पर जन-जागरुकता। लोगों को इसका अर्थ, कारण, और प्रभाव की समझ होनी चाहिये जिससे इसको जड़ से मिटाया जा सके और धरती पर जीवन की संभावानाएँ सदा के लिये मुमकिन हो।

लोगों को उनकी बुरी आदतों जैसे तेल, कोयला और गैस के अत्यधिक इस्तेमाल, पेड़ों की कटाई(क्योंकि ये कार्बनडाई ऑक्साइड को सोखने का मुख्य स्रोत है) को रोक कर, कम बिजली का इस्तेमाल कर आदि से CO2 को फैलने से रोकना चाहिए। पूरी दुनिया के लोगों में थोड़े से बदलाव से, एक दिन हम लोग इसके प्रभावों को घटाकर वातावरण में हुए नकारात्मक परिवतर्नों को रोक सकते है। जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : बेटी बचाओ
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने बेटी बचाओ अभियान के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। औरतें समाज का बहुत महत्वपूर्ण भाग है और पृश्वी पर जीवन के हर एक पहलू में बराबर भाग लेती है। हांलाकि, भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को कारण स्त्रियों के निरंतर गिरते लिंग अनुपात ने, महिलाओं के पूरी तरह से खत्म होने के डर को जन्म दिया है। इसलिये, भारत में महिलाओं के लिंग अनुपात को बनाये रखने के लिये बालिकाओं को बचाना बहुत आवश्यक है। ये भारतीय समाज में सामाजिक जागरुकता का एक बहुत महत्वपूर्ण विषय बन गया है जिसे भारतीय युवाओं को अवश्य जानना चाहिये। छात्रों के ज्ञान और लिखने के कौशल को बढ़ाने के लिये शिक्षक उन्हें इस विषय पर कक्षा में, परीक्षा के दौरान या किसी प्रतियोगिता के आयोजन पर पैराग्राफ या पूरा निबंध लिखने के लिये दे सकते है।

आजकल पूरे देश में लड़कियों को बचाने के सन्दर्भ में बेटी बचाओ विषय बहुत महत्वपूर्ण सामाजिक जागरुकता का विषय है। लड़कियों को बचाने के लिये बहुत से प्रभावशाली उपायों को अपनाया गया है जिससे इन्हें बहुत हद तक बचाया जा सकता है। समाज में बड़े स्तर पर गरीबी का प्रसार है जो भारतीय समाज में अशिक्षा और लिंग असमानता का बहुत बड़ा कारण है। तो शिक्षा, गरीबी और लिंग भेदभाव को कम करने के साथ ही भारतीय समाज में बालिकाओं और औरत की स्थिति में सुधार के लिए महत्वपूर्ण तत्व है। आकड़ों के अनुसार, ये पाया गया है कि उड़ीसा में महिला साक्षरता लगातार गिर रही है जहाँ लड़कियाँ शिक्षा और अन्य गतिविधियों में समान पहुँच नहीं रखती है।

शिक्षा गहराई के साथ रोजगार से जुड़ी हुई है। कम शिक्षा का अर्थ है कम रोजगार जो समाज में गरीबी और लिंग असमानता का नेतृत्व करता है। महिलाओं की स्थिति में सुधार करने के लिये शिक्षा बहुत प्रभावी कदम है क्योंकि ये इन्हें वित्तीय रुप से आत्मनिर्भर बनाता है। समाज में महिलाओं के समान अधिकार और अवसरों को सुनिश्चित करने के लिये सरकार ने कन्या बचाओं कदम उठाया है। बॉलीवुड अभिनेत्री (परिणीति चौपड़ा) को प्रधानमंत्री की हाल की योजना बेटी बचाओ (बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ) की एक आधिकारिक तौर पर ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है।
जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : जल संरक्षण
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने जल संरक्षण के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। स्वच्छ जल बहुत तरीकों से भारत और पूरे विश्व के दूसरे देशों में लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा साथ ही स्वच्छ जल का अभाव एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इस बड़ी समस्या को अकेले या कुछ समूह के लोग मिलकर नहीं सुलझा सकते हैं, ये ऐसी समस्या है जिसको वैश्विक स्तर पर लोगों के मिलकर प्रयास करने की जरुरत है। विभिन्न निबंध लेखन प्रतियोगिताओं तथा परीक्षा के समय विद्यार्थियों की मद के लिये बेहद सरल अलग-अलग शब्द सीमाओं में जल बचाओं के गंभीर मुद्दे पर कई सारे निबंध हम आपके बच्चों के लिये यहाँ उपलब्ध करा रहें हैं।

भविष्य में जल की कमी की समस्या को सुलझाने के लिये जल संरक्षण ही जल बचाना है। भारत और दुनिया के दूसरे देशों में जल की भारी कमी है जिसकी वजह से आम लोगों को पीने और खाना बनाने के साथ ही रोजमर्रा के कार्यों को पूरा करने के लिये जरूरी पानी के लिये लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि दूसरी ओर, पर्याप्त जल के क्षेत्रों में अपने दैनिक जरुरतों से ज्यादा पानी लोग बर्बाद कर रहें हैं। हम सभी को जल के महत्व और भविष्य में जल की कमी से संबंधित समस्याओं को समझना चाहिये। हमें अपने जीवन में उपयोगी जल को बर्बाद और प्रदूषित नहीं करना चाहिये तथा लोगों के बीच जल संरक्षण और बचाने को बढ़ावा देना चाहिये। जय हिन्द जय भारत

 

Republic Day Hindi Bhasan : धूम्रपान के दोष
आदर्निये शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावक और मेरे साथियों, मैं आप लोगों के सामने धूम्रपान के दोष के बारे में कुछ कहने जारहा हूँ। आज के दौर में धूम्रपान एक बहुत बड़ी समस्या है। शुरू में आदमी धूम्रपान उस्तुकता वश करता है पर बाद में यह आदत में बदल जाता है। धूम्रपान से बहुत सी बीमारियां होती हैं।

ग्रंथों में मादक पदार्थों के सेवन को बुरा माना गया है। धूम्रपान एक धीमा जहर है। यह शरीर को धीरे धीरे खोखला करता है। सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है। जिसके कारण मनुष्य जल्दी मर जाता है। धूम्रपान कैंसर और क्षय जैसे रोग पैदा करता है। धूम्रपान करने वाले को भूख ठीक तरह से नहीं लगती। मुंह का स्वाद भी खराब हो जाता है। मुँह से दुर्गंध नहीं जाती।
स्त्रियों के लिए धूम्रपान और भी घातक है। कुछ लोग समझते हैं कि धूम्रपान करने से मन और दिमाग को शांति मिलती है। वह यह सोचता है कि इसके पयोग से वह एकाग्र मन से काम कर सकता है। वास्तव में ये धारणा बहुत गलत है। वास्तव में धूम्रपान दिमाग को कुंठित कर देता है। धूम्रपान की डिबिया पर भी लिखा होता है कि ‘धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक होता है’, फिर भी लोग ये विष पीते हैं।
आज की युवा पीढ़ी धूम्रपान की लत में बहुत बुरी तरह जकड़ी हुई है। आज टीवी पर धूम्रपान से होने वाले नुकसान दिखाए जाते हैं, फिर भी लोग इससे सबक नहीं लेते। आज लोगों को चाहिए कि वो इस बुरी लत को छोड़कर अपनी जिंदगी को खुशहाल बनायें।

जय हिन्द जय भारत

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