भारत के सभी राज्यों को उसकी आबादी के आधार पर लोकसभा सदस्य संख्या मिलते है। फ़िलहाल यह 1971 की आबादी पर आधारित है। अगली बार लोकसभा सदस्य संख्या वर्ष 2026 मे निर्धारित किया जायेगा। इससे पहले हर एक दशक की जनगणना के अनुसार सदस्य स्थान निर्धारित होते थे। यह कार्य बकायदा 84वें संविधान संशोधन (2001) से किया गया था ताकि राज्य अपनी आबादी के आधार पर ज्यादा से ज्यादा स्थान प्राप्त करने की कोशिश न करे।

लोकसभा सदस्य संख्या

वर्तमान परिपेक्ष्य में राज्यों की आबादी के हिसाब से वितरित सीटों की संख्या के अनुसार उत्तर भारत का प्रतिनिधित्व, दक्षिण भारत के मुकाबले काफी कम है। जहां दक्षिण के चार राज्यों, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल को जिनकी संयुक्त जनसंख्या देश की जनसंख्या का सिर्फ 21% है, इनको 129 लोक सभा की सीटें आवंटित की गयी हैं जबकि, सबसे अधिक जनसंख्या वाले हिन्दी भाषी राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार जिनकी संयुक्त जनसंख्या देश की जनसंख्या का 25.1% है के खाते में सिर्फ 120 सीटें ही आती हैं। वर्तमान में अध्यक्ष और आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो मनोनीत सदस्यों को मिलाकर, लोकसभा सदस्य संख्या 545 है।

लोकसभा सदस्य संख्या निम्न प्रकार से 29 राज्यों और 7 केन्द्र शासित प्रदेशों के बीच बांटी गयी है: –

SLउपविभाजनप्रकारनिर्वाचन क्षेत्रों की संख्या
01अण्डमान और निकोबार
द्वीपसमूह
केन्द्र शासित प्रदेश1
02आन्ध्र प्रदेशराज्य25
03अरुणाचल प्रदेशराज्य2
04असमराज्य14
05बिहारराज्य40
06चंडीगढ़केन्द्र शासित प्रदेश1
07छत्तीसगढ़राज्य11
08दादरा और नगर हवेलीकेन्द्र शासित प्रदेश1
09दमन और दीवकेन्द्र शासित प्रदेश1
10दिल्लीकेन्द्र शासित प्रदेश7
11गोवाराज्य1
12गुजरातराज्य26
13हरियाणाराज्य10
14हिमाचल प्रदेशराज्य4
15जम्मू और कश्मीरराज्य6
16झारखंडराज्य14
17कर्नाटकराज्य28
18केरलराज्य20
19लक्षद्वीपकेन्द्र शासित प्रदेश1
20मध्य प्रदेशराज्य29
21महाराष्ट्रराज्य48
22मणिपुरराज्य2
23मेघालयराज्य
24मिज़ोरमराज्य1
25नागालैंडराज्य1
26उड़ीसाराज्य21
27पुदुच्चेरीकेन्द्र शासित प्रदेश1
28पंजाबराज्य13
29राजस्थानराज्य25
30सिक्किमराज्य1
31तमिल नाडुराज्य39
32त्रिपुराराज्य2
33उत्तराखंडराज्य5
34उत्तर प्रदेशराज्य80
35पश्चिम बंगालराज्य42
36तेलंगानाराज्य17

आंग्ल-भारतीय (2, अगर राष्ट्रपति मनोनीत करे (संविधान के अनुच्छेद 331 के तहत))

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लोक सभा का कार्यकाल

अगर समय से पहले भंग ना किया जाये तो, लोक सभा का कार्यकाल अपनी पहली बैठक से लेकर अगले पाँच वर्ष तक होता है, उसके बाद यह खुद ही भंग हो जाती है। लोक सभा के कार्यकाल के दौरान अगर आपातकाल की घोषणा की जाती है, तो संसद को इसका कार्यकाल कानून के द्वारा एक समय में अधिकतम एक वर्ष तक बढ़ाने का अधिकार है, जबकि आपातकाल की घोषणा समाप्त होने की स्थिति में इसे किसी भी परिस्थिति में छ: महीने से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।

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लोकसभा सदस्य संख्या की और अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया का यह पोस्ट भी पढ़ सकते हैं. दोस्तों आपको हमारा यह पोस्ट ” लोकसभा सदस्य संख्या ” कैसा लगा कमेंट कर के जरूर बताएं और सोशल मीडिया पर Share जरूर करें.

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