Jamia - JMI CDOL

Jamia Model Sample Question Papers For Distance Mode (CDOL)

Jamia Model Sample Question Papers

Jamia Model Sample Question Papers for Distance Mode (CDOL) for almost all courses like MEG, MHD, MAS, MAH, MHRM, MAPA, MAPS, MCOM, MAE, BED, BAG, BCOM, BCIBF, BBA, PGDGC, PGDGI, DECCE, CCHNT, CIT. Our model test papers are completely based on current syllabus announced by the Jamia Millia Islamia ( JMI ) CDOL. Our model test papers are comprises of both Short & Long Questions ( MCQs as well as Descriptive ) with answers.

Jamia Model Sample Question Papers

Features of Jamia Model Sample Question Papers for Distance Mode (CDOL):

▪ Pattern of Questions are completely Based on latest Syllabus.
▪ All the question papers are be prepared by highly qualified dedicated team of experts.
▪ You can have it within a day anywhere in the globe.
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Good News: Now Questions Papers with Answers are available for below course:-

BAG ( Bachelor in Arts )  (For Indian Defence Personnel) – Hindi and English Medium

Name and Codes of Subjects

  1. BPS04 – अंतर्राष्ट्रीय राजनीति ( International Politics )
  2. BPS05 – भारत में सरकार और राजनीति ( Government and Politics in India )
  3. BHIS04 – आधुनिक भारत का इतिहास 1707 से 1950 ( History of Modern India 1707-1950 )
  4. BHIS05 – आधुनिक विश्व 17वीं से 20वीं शताब्दी तक ( The Modern World 17th to 20th Century )
  5. BSO04 – भारत में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक समस्याएं ( Social Change and Social Problems in India)
  6. BSO05 – मीडिया और समाज ( Media and Society )

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Indian Defence Personnel Assignments of Jamia Distance Mode (CDOL)

Jamia Model Sample Question Papers with solution will be available for the following courses:

1. Masters in English, MEG
2.   Masters in Hindi, MHD
3.   Masters in Sociology, MAS
4.   Masters in History, MAH
5.   Masters in Human Resource Management, MHRM
6.   Masters in Public Administration, MAPA
7.   Masters in Political Science, MAPS
8.   Masters in Commerce, MCOM
9.   Masters in Education, MAE
10. Bachelor of Education, BED
11. Certificate in Information Technology, CIT
12. Bachelor of Commerce, BCOM
13. Bachelor of Commerce – International Business and Finance, BCIBF
14. Bachelor of Business Administration, BBA
15. Post Graduate Diploma in Guidance and Counselling, PGDGC
16. Post Graduate Diploma in Geoinformatics, PGDGI
17. Diploma in Early Childhood Care and Education, DECCE
18. Certificate in Computer Hardware and Network Technology, CCHNT

Jamia assignments are available for all courses

Samples for Jamia CDOL Final Exam Model Sample Question Papers given below:

Short Questions

Q1. विचारधारा के अंत का क्या मतलब है?

उत्तर:- विचारधारा की वर्तमान स्थिति पर 1950 और 1960 के दशक के मध्य में पुनर्विचार किया गया था। पश्चिमी उदार लोकतांत्रिक देश में, विचारधारा के युग के अंत की घोषणा कर दी गई थी। विचारधारा के अंत का यह भी मतलब था कि औधोगिक विकास के अनंत स्तर पर, एक देश का सामाजिक व आर्थिक संगठन उसके विस्तार के स्तर से मापा जाता है, न कि उसकी राजनीतिक विचारधारा से।

Q2. विकासहीन और विकासशील देश, विकसित देशों के साथ गठबंधन करना क्यों पसंद करते हैं?

उत्तर:- विकासहीन तथा विकासशील देशों को अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में प्रसिद्ध संरचनात्मक बाधाओं कथा बल विषमताओं का सामना करना पड़ता है। इन राष्ट्र-राज्यों का सीमित आर्थिक भार, आमतौर पर राष्ट्रीय लेनदेन में इनका महत्व कम कर देता है। अपने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए, दूसरे विकासशील देशों के साथ गठबंधन में भाग लेने से विकासशील देशों के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा मिलता है। आजकल यह रणनीति बहुत से देशों द्वारा अपनाई जा रही है।

 

Long Question

Q1. राष्ट्रीय हित क्या है? राष्ट्रीय हित के मुख्य घटकों की चर्चा कीजिए ।

उत्तर:

राष्ट्रीय हित (National interest) क्या है

राष्ट्रीय हित से आशय किसी देश के आर्थिक, सैनिक, साम्स्कृतिक लक्ष्यों एवं महत्वाकाक्षाओं से है। राष्ट्रीय हित अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि राज्यों के आपसी संबंधों को बनाने में इनकी विशेष भूमिका होती है। किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति मूलतः राष्ट्रीय हितों पर ही आधारित होती है, अतः उसकी सफलताओं एवं असफलताओं का मूल्यांकन भी राष्ट्रीय हितों में परिवर्तन आता है जिसके परिणामस्वरूप विदेश नीति भी बदलाव के दौर से गुजरती है।

 

चार्ल्स लर्च अब्दुल सईद राष्ट्रीय हित व्यापक, दीर्घकालीन एवं सतत् उद्देश्यों पर आधारित होते हैं जिनकी प्राप्ति हेतु राज्य, राष्ट्र व सरकार में सब अपने को प्रयत्न करता हुआ पाते हैं।

वनर्न वॉन डाईकराष्ट्रीय हित की रक्षा या उपलब्धि राज्य परस्पर मुकाबले में करना चाहते हैं। राष्ट्रीय हित की परिभाषा ही नहीं बल्कि इसके उद्देश्यों को लेकर भी विद्वान एकमत नहीं है। कुछ विद्वान इन्हें विदेश नीति के उद्देश्यों से जुड़ा मानते हैं तो कुछ इसके मूलभूत मूल्यों से जुड़ा मानते हैं। पहली श्रेणी के विद्वानों के अनुसार यह स्थाई, अपरिवर्तित तथा शक्ति से जुड़ी अवधारणा है, लेकिन दूसरे इन्हें राष्ट्र के कल्याण, राजनैतिक विश्वास के संरक्षण, सीमाओं से सुरक्षा, क्षेत्रीय अखण्डता व राष्ट्रीय जीवन पद्धति से जुड़ा मानते हैं। परन्तु वास्तविक स्थिति यह है कि राष्ट्रीय हित व्यापक सन्दर्भ के रूप में लिए गए हैं।

 

राष्ट्रीय हित के मुख्य घटक (Main components)

राष्ट्रीय हितों के संदर्भ में जो भी बातें कही जाए, अन्ततः सत्य यह है कि सभी राष्ट्र इनकी अभिवृद्धि हेतु भरसक प्रयत्न करते हैं। इस संदर्भ में राष्ट्र विभिन्न साधनों का उपयोग करते हैं जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:- 

  1. राजनय: किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति का कार्यान्वयन राजनय के माध्यम से ही होता है। राजनय अपने आप में नैतिक अनैतिक नहीं होता बल्कि अपने राष्ट्र हितों के अनुरूप होता है। न ही यह एक वस्तुनिष्ठ स्थिति है, बल्कि यह व्यक्तिपरक व्यवस्था है जिसका आकलन प्रत्येक राष्ट्र अपने-अपने दृष्टिकोण के अंतर्गत करता है।
  1. प्रचार: प्रचार भी राष्ट्रीय हितों में वृद्धि एवं पूर्ति का महत्त्वपूर्ण तरीका है। प्रचार दूसरे राष्ट्रों के तर्कों को गलत सिद्ध करने तथा अपनी बात को फैलाने का हमेशा तरीका रहा है, लेकिन 20वीं शताब्दी में ही प्रचार को एक मुख्य साधन के रूप में उपयोग किया गया है। इसका अति स्पष्ट रूप दो विश्व युद्धों के बीच के काल में देखने को मिला जब विभिन्न विचारधाराओं – साम्यवाद, नाजीवाद, फासिज्म – के माध्यमों से राष्ट्रों ने अपनी शक्ति स्थापित एवं संवर्धन हेतु इनका उपयोग किया।
  1. राजनैतिक युद्ध: राजनैतिक युद्ध भी राष्ट्रहितों की अभिवृद्धि का एक महत्त्वपूर्ण साधन रहा है। यह न तो युद्ध है परन्तु न ही शान्ति। इसके द्वारा राजनय के माध्यम से राज्यों के मध्य दण्डात्मक स्थिति बनाना या आर्थिक प्रतिबन्ध लगाना जिससे विरोधियों पर दबाव की स्थिति बनी रहती है।
  1. आर्थिक साधन: वर्तमान युग अन्तःनिर्भरता का युग है। प्रत्येक राष्ट्र, कितना ही शक्तिशाली हो या कितना ही छोटा हो, सभी को परस्पर एक दूसरे पर निर्भर रहना पड़ता है। कोई भी सम्पूर्ण रूप से आत्म निर्भर नहीं है। परन्तु प्रत्येक राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति हेतु वे राष्ट्र अपने संसाधनों के बल पर अपने राष्ट्रीय हितों की अभिवृद्धि करते हैं।
  1. आयात शुल्क लगाना: गौण आर्थिक तन्त्र के आधार पर प्रयुक्त होने वाले साधनों के अंतर्गत – रियासत, बहिष्कार, नाकेबन्दी आते हैं। इन्हीं आर्थिक साधनों के द्वारा राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों में अभिवृद्धि करते हैं।
    i. अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों को अपने पक्ष में रखना;
      ii. कम मूल्य पर निर्यात करना;
     iii. कर्ज या अनुदान देकर;
     iv. विदेशी सहायता प्रदान करना आदि। 
  1. उपनिवेशवाद नव उपनिवेशवाद: उपनिवेशवाद के माध्यम से 18वीं व 19वीं शताब्दी में यूरोप की बड़ी ताकतों ने तीसरी दुनिया के ज्यादातर देशों पर राज्य किया है। इसके अंतर्गत विदेशी राज्यों पर बाह्य शक्तियों का शासन चलाया जाता रहा है जो स्थानीय लोगों के सभी विषयों पर अपना नियंत्रण रखते हैं। पूरी राजनैतिक व्यवस्था उनके हाथ में होती थी। सरकार विदेशी ताकतों द्वारा ही चलाई जाती थी। भू-भाग पर भी पूर्ण नियंत्रण बाह्य शक्तियों का ही होता था।
  2. युद्ध: युद्ध को भी अन्तिम विकल्प के रूप में राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों के संवर्द्धन हेतु प्रयोग कर लेते हैं। युद्धों हेतु विभिन्न कारण व इसके विभिन्न स्वरूप होते हैं। परन्तु वर्तमान युग में हथियारों की मारक क्षमता एवं उनके विध्वंसक स्वरूप के कारण राष्ट्र युद्धों के प्रयोग से बचते हैं, परन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि युद्धों का त्याग कर दिया गया। बड़ी शक्तियां आज भी अपने राष्ट्र हितों की पूर्ति हेतु इसके प्रयोग से नहीं चूकती हैं।

अतः उपरोक्त साधनों के माध्यम से शक्तियां अपने राष्ट्रीय हितों में वृद्धि करती रहती है। यह शक्ति संवर्द्धन शान्तिपूर्ण तरीकों से लेकर युद्ध तक के अनेक निर्धारण तत्वों के द्वारा किया जाता है।

 English Medium

Q1. What is balance of power? Examine the method of adoption in achieving balance of power.

Ans:

Balance of power
“Whenever the term Balance of Power is used without qualification, it refers to an actual state of affairs in which power is distributed among nations with approximately equality” – Hans. J. Morgenthau.

“Unmanaged struggle for power can be a source of war in international relations.”

Such a realization stands universally recognized and it has led to the development of certain devices of power management. One such device has been Balance of Power.

 

Method of adoption in achieving balance of power

I. Compensation: It is also known as territorial compensation. It usually entails the annexation or division of the territory of the state whose power is considered dangerous for the balance. In the 17th and 18th centuries this device was regularly used for maintaining a balance of power which used to get disturbed by the territorial acquisitions of any nation.

For examples the three partitions of Poland in 1772, 1793 and 1795 were based upon the principle of compensation. Austria, Prussia and Russia agreed to divide Polish territory in such a way that the distribution of power among them would be approximately the same.

II. Alliances and Counter Alliances: Alliance-making is regarded as a principal method of balance of power. Alliance is a device by which a combination of nations creates a favourable balance of power by entering into military or security pacts aimed at augmenting their own strength vis-a-vis the power of their opponents.

III. Intervention and Non-intervention: “Intervention is a dictatorial interference in the internal affairs of other state/states with a view to change or maintain a particular desired situation which is considered to be harmful or useful to the competing opponents.

IV. Divide and Rule: The policy of divide and rule has also been a method of balance of power. It has been a time honored policy of weakening the opponents. It is resorted to be all such nations who try to make or keep their competitors weak by keeping them divided or by dividing them.

The French policy towards Germany and the British policy towards the European continent can be cited as the outstanding examples. The rich and powerful states now do not refrain from using divide and rule for controlling the policies of the new states of Asia, Africa and Latin America.

V. Armaments and Disarmaments: All nations, particularly very powerful nations, place great emphasis on armaments as the means for maintaining or securing a favourable position in power relations in the world. It is also used as a means to keep away a possible aggressor or enemy.

 

Q2. Discuss meaning, types of organisation and explain in detail the types of organizations’ Structure. 

Ans:

Meaning of organization

A social unit of people that is structured and managed to meet a need or to pursue collective goals. All organizations have a management structure that determines relationships between the different activities and the members, and subdivides and assigns roles, responsibilities, and authority to carry out different tasks. Organizations are open systems–they affect and are affected by their environment. An organization or organisation (see spelling differences) is an entity comprising multiple people, such as an institution or an association that has a collective goal and is linked to an external environment.

Types of organization

There are a variety of legal types of organizations, including corporations, governments, non-governmental organizations, political organizations, international organizations, armed forces, charities, not-for-profit corporations, partnerships, cooperatives, and educational institutions.

Types of organizations’ Structure

These organisational structures are briefly described in the following paragraphs:

  1. Line Organisational Structure: A line organisation has only direct, vertical relationships between different levels in the firm. There are only line departments-departments directly involved in accomplishing the primary goal of the organisation.
  2. Staff or Functional Authority Organisational Structure: In the line organisation, the line managers cannot be experts in all the functions they are required to perform. But in the functional authority organisation, staff personnel who are specialists in some fields are given functional authority.
  3. Line and Staff Organisational Structure: Most large organisations belong to this type of organisational structure. These organisations have direct, vertical relationships between different levels and also specialists responsible for advising and assisting line managers.
  4. Divisional Organisational Structure: In this type of structure, the organisation can have different basis on which departments are formed. They are; Function, Product, Geographic territory, Project and Combination approach.
  5. Project Organisational Structure: A project organisation is a temporary organisation designed to achieve specific results by using teams of specialists from different functional areas in the organisation. The project team focuses all its energies, resources and results on the assigned project.
  6. Matrix Organisational Structure: It is a permanent organisation designed to achieve specific results by using teams of specialists from different functional areas in the organisation.
  7. Hybrid Organisational Structure: This type of structure is used by multinational companies operating in the global environment, for example, International Business Machines USA. This kind of structure depends on factors such as degree of international orientation and commitment.

 

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13 comments

  1. Rana 27 April, 2018 at 20:08 Reply

    I need the model test papers and previous years question papers for MA political science for cdol JAMIA…..how can I get that

  2. Mohini Arora 8 May, 2018 at 09:19 Reply

    I need the previous year's papers for MA – Education (MAE) – 1st Year .
    Please let me know asap

    • Eguardian India 4 July, 2018 at 16:14 Reply

      Dear Sandeep,
      Thanks for your comment, as you know very few students are taking admission in Bcom course so we have yet not prepared Model papers. Inconvenience is deeply regretted.

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