Hindi Kawita Ghazal Shayari & Jokes

तारीफ और मिज़ाज़ पर हिंदी शायरी का सबसे अच्छा संग्रह यहाँ उपलब्ध है

हुस्न की तारीफ पर हिंदी शायरी का सबसे अच्छा संग्रह यहाँ उपलब्ध है

 

उसके चेहरे की चमक

उसके चेहरे की चमक के सामने सब सादा लगा

आसमान पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा

 

हमारे सुहाग की वो रात

कैसी थी वो रात कुछ कह सकता नहीं मैं

चाहूँ कहना तो बयां कर सकता नहीं मैं ,

दुल्हन बन के मेरी जब वो मेरी बाँहों में आयी थी

सेज सजी थी फूलों की पर उस ने महकाई थी

घूँघट में इक चाँद था और सिर्फ तन्हाई थी

आवाज़ दिल के धड़कने की भी फिर ज़ोर से आयी थी

प्यार से जो मैंने घूँघट चाँद पर से हटाया था

प्यार का रंग भी उतरकर उसके चेहरे पर आया था

बाँहों में ले कर उसको फिर लबो की लाली चुराई थी

उस सर्द रात में साँसे भी शोला बन कर टकराई थी

टिका बिंदी , कंगना , पायल सब ने शोर मचाया था

जब उसके शोख बदन को मैंने हाथ लगाया था ,

डूब गए थे हम दोनों उस दहकती प्यार की आग में

तोड़ दिया था हम ने कलियों को उसके प्यार के बाग़ में

क्या बतलाये अब हम वह रात किस कदर निराली थी

हमारे सुहाग की वो रात ,जो इतनी शोख मतवाली थी

 

हुस्न की शोखियाँ

बादलों में छुप रहा है चाँद क्यों

अपने हुस्न की शोखियों से पूछ लो

चांदनी पड़ी हुई है मंद क्यों

अपनी ही किसी अदा से पूछ लो

 

नज़र इस हुस्न पर

नज़र इस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे

कभी जो फूल बन जाये कभी रुखसार हो जाये

 

शफ़्फ़ाफ़ बदन

उफ़ वो संगेमरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन

देखने वाले जिसे ताज महल कहते हैं

 

ज़र्रे को आफताब होना था

हुस्न को बे-हिज़ाब होना था

शौक़ को कामयाब होना था

हिजर में कैफ-ऐ-इज़्तेराब न पूछ

खून -ऐ -दिल भी शराब होना था

तेरे जलवों पे मर मिट गए आखिर

ज़र्रे को आफताब होना था

कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी

कुछ मुझे भी खराब होना था

रात तारों का टूटना भी ‘मजाज़’

बाइस -ऐ -ना उम्मीद होना था

 

तेरी सादगी

तेरी सादगी का हुस्न भी लाजवाब है

मुझे नाज़ है के तू मेरा इंतेख़ाब है

 

लोग किताबो जैसे

आँखे झीलों की तरह होंठ गुलाबो जैसे

अब भी होते है कई लोग किताबो जैसे

 

अपना होश नहीं

जब से देखा हैं उन्हें मुझे अपना होश नहीं

जाने क्या चीज़ वो नज़रो से मुझे पिला देतें है

 

जिनसे चाँद शर्माए

जरा सी देर के लिए सब कुछ भुला के देख लेते है

तुन्हे हम सामने बैठा कर देख लेते है

वो चेहरे कैसे होते है की जिनसे चाँद शर्माए

जरा तेरे चेहरे से जुल्फे हटा कर देख लेते है

 

हसीं ख्वाब

तेरे नैनो की शोख अदाओं ने हमे लूटा लिया

तेरी झील सी गहरी आँखों ने हमे लूटा लिया

हम तो लूट चुके है इस कदर ऐ हसीं ख्वाब

अब डरता हूँ कहीं कोई लूट न ले मेरे ख्वाब

 

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है

तो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

सुना है राफत है उसे खराब हालो से

तो अपने आप को बर्बाद कर के देखते है

सुना है दर्द की गाहक है चस्मे नाज़ उसकी

तो हम भी उसकी गली से गुजर के देखते है

सुना है उसको भी है शेयर -ओ -शायरी से सराफ

तो हम भी मोईझे अपने हुनर के देखते है

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है

यह बात है तो चलो बात कर के देखते है

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है

सितारे बामे-ऐ-फलक से उतर के देखते है

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती है

सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते है

सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है

फूल अपनी कवाएं क़तर के देखते है

रुके तो गर्दिशयें उसका तवाफ़ करते है

चले तो उसे ज़माने ठहर के देखते है

 

हसीनो की दोस्ती

हसीनो से तो बस साहिब सलामत दूर से अच्छी

न इनकी दोस्ती अच्छी न इनकी दुस्मनी अच्छी

 

वो बला की शोख़ी

वो बला की शोख़ी देखी है तेरी नज़रो मैं

वो हुस्न वो नजाकत वो बेकाबू जुल्फ की घटा

क्या क्या बयान करू मैं ऐ शोख हसीना

हर बात बेमिासल है तेरे हुस्न की

 

तेरे रुखसार

दिल तो चाहता है चूम लू तेरे रुखसार…

फिर सोचते हैं के तेरे हुस्न को दाग़ न लग जाए …

 

इश्क़ का इम्तिहान

क्यों यह हुस्न वाले इतने मिज़ाज़ -ऐ -गरूर होते है

इश्क़ का लेते है इम्तिहान और खुद तालीम -ऐ -जदीद होते है

 

कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद

तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत नहीं है ग़ालिब

कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद

यह पर्दादारी है क्या तमाशा

मुझ ही में रह कर मुझी से पर्दा

तबाह करना अगर है मुझको

नकाब उठा तबाह कर

कांच का जिस्म कहीं टूट न जाये

हुस्न वाले तेरी अंगड़ाइयो से डर लगता है

जख्म है गहरे और न आये मुझे उन्हें सीना

उसके जख्मो के बिन जिंदगी क्या जीना

अगर लफ्ज़ो में तेरी तारीफ करू तो

तेरे हुस्न की बेअदबी होगी

बस तू यह जान ले

चाँद भी अधूरा है तेरे बिना

हुस्न वालों के पीछे दीवाने चले आते है

शमा के पीछे परवाने चले आते है

तुम भी चली आना मेरे जनाजे के पीछे

उसमे अपने तो क्या बेगाने भी चले आते है

कातिल तेरी अदाओं ने लूटा है

मुझे तेरी जफ़ाओं ने लूटा है

शौंक नहीं था मुझे मर मिटने का

मुझे तो आपकी इन्ही निगाहों ने लूटा है

तेरे हुस्न की तारीफ मेरी शायरी के बस की नहीं….

तुझ जैसी कोई और कायनात में ही नहीं बनी….

तेरा मुस्कुराना देना जैसे पतझड़ में बहार हो जाये….

जो तुझे देख ले वो तेरे हुस्न में ही खो जाये….

आंखे तेरी जैसी समन्दर हो शराब का…

पी के झूमता रहे कोई नशा तेरे शबाब का….

होंथ तेरे गुलाब के फूल से भी कोमल है….

चूमते वक्त कहीं खरोच ना लग जाये दिल में बस मेरे ये ही डर रहे…

तेरे जिस्म की बनावट संगमरमर की मूरत से कम नहीं….

तुझे देख लूं जी भर के फिर मरने का भी गम नहीं…

तेरी जुबान से निकले जो बोल तो मानों कोयल भी शरमा जाये…

तू जो अपने जुबान से मर जाने को कहे तो मरने वाले को भी मरने का मजा आ जाये….

मैं अदना सा एक शायर तेरे हुस्न की और क्या तरीफ करूं…

मैं तेरे लिए ही जीता हूं और रब करे तेरे लिए ही मरूं….

 

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