“सोशल मीडिया का युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव और दुष्परिणाम पर निबंध”

दुनिया में प्रौद्योगिकी की प्रगति मानव के लिए एक वरदान रही है; और आज कंप्यूटर और मोबाइल उपकरण हमारे दैनिक जीवन का एक हिस्सा बन गए हैं। इंटरनेट भी इन्हीं तकनीक का एक हिस्सा है जिसकी हम में से कई लोग सराहना भी करते आए हैं। मूल रूप से, इंटरनेट ही है जो इन दिनों दुनिया को मुट्ठी में कर देता है। उदाहरण के लिए, सोशल मीडिया, जिसने दुनिया भर में लोगों के बीच बातचीत करने के लिए एक आधार पैदा की है।

सोशल मीडिया

सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव अज्ञात नहीं हैं। अफसोस की बात है कि हमारे किशोरों और युवाओं को इस के इस्तेमाल से लेकर उनको विलुप्त होने तक ले जाया गया है। अगर उनकी निगरानी नहीं की गई या प्रतिबंधित नहीं किया गया, तो इससे उनकी भलाई नहीं होगी और गंभीर प्रभाव भी पड़ सकते हैं।

युवा सोशल मीडिया पर बहुत समय बिताते हैं इस लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह किशोरों को कैसे प्रभावित करता है।
किशोर पर इसका प्रभाव खतरनाक हो सकता है। आइए किशोरों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों को देखते हैं।

किशोरों पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव (The Negative Effects of Social Media on Teenagers)

सोशल मीडिया किशोरों को कैसे प्रभावित करता है? हमें इस तथ्य को स्वीकार करना चाहिए कि यह किशोर जीवन के विकास और विकासात्मक पहलुओं के लिए बेहद संवेदनशील हैं। और इसलिए, बच्चों पर सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले प्रभावों का प्रत्येक वयस्क के लिए विशेष महत्व होना चाहिए। बच्चों पर पड़ने वाले इसका नकारात्मक प्रभावों को समय-समय पर देखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया एक महान सामाजिक नेटवर्क उपकरण के रूप में जाना जाता है, समाज में इसकी बुराइयों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। किशोरों में विशेष रूप से इसका उपयोग से संभावित नुकसान की आशंका होती है।

सोशल मीडिया के इन नकारात्मक प्रभावों को अगर समय पर नहीं पहचाना गया और नियंत्रित नहीं किया गया तो यह आपके बच्चों के स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

युवाओं पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव निम्नानुसार हैं:

1. नींद न आना
2. सामाजिक अलगाव
3. साइबर-धमकी या साइबरबुलिंग
4. फेसबुक डिप्रेशन यानी अवसाद
5. इंटरनेट की लत
6. आत्म-सम्मान कम होना
7. दैनिक गतिविधि में कमी
8. एकाग्रता (ध्यान) में कमी

1. नींद न आना (Sleep deprivation)

सोशल मीडिया आज किशोरावस्था में नींद न आने के प्रमुख कारणों में से एक है। वे लगातार इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनके दोस्त क्या पोस्ट कर रहे हैं और क्या साझा कर रहे हैं। और अगर वे विशेष रूप से सोने के समय या सोने से ठीक पहले ऐसा करते हैं, तो उनकी नींद बाधित होने की बहुत अधिक संभावना है। यदि उनको रुकने के लिए प्रेरित नहीं किया गया तो किशोर अधिक अवधि तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रह सकते हैं। इसका अधयन आपको नींद के महत्व और नींद के नुकसान के जुड़े जोखिमों को समझने में मदद कर सकती है।

2. सामाजिक अलगाव (Social isolation)

सोशल मीडिया के उपयोग और सामाजिक अलगाव के बीच एक गहरा संबंध है। जब किशोर किसी पार्टी की तस्वीरें या वीडियो देखते हैं, जहां उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था, तो उसे चिंता हो जाती है कि उसे क्यों दावत नहीं दिये गए।  इसे “गुम होने के डर” (Fear of missing out) या FOMO के रूप में जाना जाता है।

अधिकांश बच्चों का मानना ​​है कि वे सोशल मीडिया का उपयोग करके विभिन्न व्यक्तियों से जुड़ रहे हैं, लेकिन वास्तव में वे वर्तमान समय और अपने जीवन से बाहर हैं। यह डर तो आसपास के लोगों से बहुत अधिक दुरी का कारण बन सकता है।

3. साइबर-धमकी या साइबरबुलिंग (Cyber bullying)

एक साइबर बुली (बदमाश) विशिष्ट सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को झूठी, शर्मनाक या शत्रुतापूर्ण जानकारी देने के लिए इसका उपयोग करता है। Social Media के प्रमुख नकारात्मक प्रभावों के बीच, साइबरबुलिंग सबसे खतरनाक है जो इस तरह के असामान्य अंतर्ज्ञान बन गया है। लंबे समय तक साइबर बदमाशी के शिकार लोग अक्सर डिप्रेशन, अलगाव, अकेलापन, तनाव और चिंता में रहते हैं वह अपने आत्मसम्मान में कमी को महसूस करता है और कुछ तो आत्महत्या जैसे मनोवैज्ञानिक समस्याओं तक कर बैठते हैं। इन गतिविधियों को उग्र बनाने वाले साइबरबुलिंग के पीछे सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की नासमझी का बहुत बड़ा हाथ होता है।

साइबरबुलिंग के प्रभावों  को कैसे रोका जाये
साइबर-धमकी या साइबरबुलिंग को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाए किये जा सकते हैं:-
1. उन प्रभावों को समझें जो किशोरों के लिए जोखिम पैदा करते हैं
2. सभी Social Media प्लेटफॉर्म्स से खुद को भी परिचित करें
3. सोशल मीडिया पर दूसरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए किशोर क्या-क्या करते हैं, इस पर जानकारी प्राप्त करें
4. अपने बच्चे के साथ इस विषय पर बातचीत करें
5. सोशल मीडिया के उपयोग पर कुछ नियम निर्धारित करें
6. यदि आपके बच्चे के डिवाइस पर Social Media उपयोग के निगरानी के लिये ऐप कि आवशयकता होतो जरुर इसतेमाल करें

4. फेसबुक डिप्रेशन यानी अवसाद (Facebook depression)

फेसबुक डिप्रेशन एक भावनात्मक असंतुलन है जो सोशल मीडिया के उपयोग से जुड़ा है। जब एक किशोर को अपने Social Media के दोस्तो में हीनता महसूस करते है, तो वे अक्सर डिप्रेशन यानी अवसाद में पड़ जाते हैं जिसे आमतौर पर फेसबुक डिप्रेशन यानी अवसाद कहा जाता है। ऐसे किशोरों के लिए उनके फेसबुक या ट्विटर मित्रों द्वारा उनके लिए खड़े होने या उसे स्वीकार किए जाने की आवश्यकता होती है जो ऐसे युवाओ को डिप्रेशन के इस रूप से बचा सकते हैं।

5. इंटरनेट की लत (Internet addiction)

किशोरों में अनियंत्रित सोशल मीडिया के उपयोग से इंटरनेट की लत लग जाती है। बच्चे जितना अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं, वे उतनी ही नई कहानियों और विचारों के संपर्क में आ जाते हैं जो वे तलाशना चाहते हैं। यह आदत अंततः एक लत में बदल जाती है। अगर जल्द संभाला नहीं गया तो उनके स्कूल पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और यहां तक ​​कि व्यक्तिगत विकास भी प्रभावित हो सकता है।

6. आत्म-सम्मान कम होना (Lower self-esteem)

ज्यादातर किशोर लड़कियां सोशल मीडिया पर समय बिताने के बाद मशहूर हस्तियों से अपनी तुलना करना शुरू कर देती हैं और उनकी तरह पतली, सुंदर और अमीर दिखना चाहती हैं। किशोरावस्था में, उन व्यक्तियों को कॉपी करना सामान्य है जिनहें वे अपना आदर्श मानते है और जिसका वे प्रशंसा करते हैं। यह नकल उनके स्वाभिमान और गरिमा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।

अलग-अलग अध्ययनों से पता चलता है कि लड़किया जो सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताते हैं वह अपने आपको उन मशहूर हस्तियों के समान चित्रित करने के लिए अपने मित्र मंडलियों से अलग हो जाती है। और आखिर मे होत यह है कि उनके दोस्त उन्हें स्वीकार नहीं करते हैं। और फिर वे धीरे-धीरे अपना आत्म-सम्मान खो देती है।

7. दैनिक गतिविधि में कमी (Decreased daily activity)

सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा उपयोग करने वाले किशोर उन गतिविधियों पर पर्याप्त समय नहीं बिताते हैं जो निश्चित रूप से मानसिक क्षमताओं, कौशल और शारीरिक क्षमताओं को बढ़ाते हैं। जो लोग रोजाना व्यायाम करते हैं, उनका शरीर एंडोर्फिन छोड़ता है जो कि हमारे मस्तिष्क को सकारात्मक रहने और डिप्रेशन को कम करने का संकेत देता है। इस प्रकार घटी हुई दैनिक गतिविधियाँ एंडोर्फिन के श्रोतों को कम करती हैं और इससे डिप्रेशन एक आम समस्या बन जाती है।

8. एकाग्रता (ध्यान) में कमी (Poor concentration)

आज छात्रों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को आसानी से देखे जा सकते हैं। विभिन्न कार्यों, जैसे कि स्कूलवर्क, क्लासवर्क या होमवर्क, किसी भी महत्वपूर्ण चीज़ से निपटने के लिए अधिक एकाग्रता (ध्यान) की आवश्यकता होती है, लेकिन अब किशोरों को सोशल मीडिया का उपयोग करने की आदत लग गई है। उनमें से ज्यादातर इसे मल्टीटास्किंग मानते हैं लेकिन सच्च में ऐसा नहीं है। शोध बताते हैं कि निरंतर सोशल मीडिया का उपयोग ध्यान पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, और यह अध्यन, सीखने और प्रदर्शन में रुकावट पैदा करता है।

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निष्कर्ष: सोशल मीडिया में बनाये गए दोस्त आपको शायद बहुत ही कम जनता हो इसलिए जितना हो सके इसे कम ही इस्तेमाल करें नहीं तो आपका जीवन नष्ट और बर्बाद हो जायेगा, समाज में आपको पूछने वाला कोई नहीं होगा।

आप असली जिंदगी में दोस्त बनाये और हमेशा खुश रहें यही हमारी कामना है, आपको सोशल मीडिया का युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पर लिखा यह पोस्ट कैसा लगा कमेंट कर के जरुर बताएं और यदि आपके मन में कोई सवाल होतो बेझिझक हम से पूछें।

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