बिहार के उत्तर-पूर्वी भाग, को ‘ सीमांचल ‘ (सीमा क्षेत्र / Seemanchal ya Simanchal ) कहा जाता है, जिसमें अररिया, कटिहार, किशनगंज, मधुपुरा, पूर्णिया और सुपौल जिला शामिल हैं। यहां शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और स्वच्छता, संचार और इसी तरह से कई समस्याएं हैं। भारत की आजादी के बाद से ही यहाँ के आम लोगों की समस्याओं को राज्य या केंद्र द्वारा समाधान करने के लिए उचित रूप से कदम नहीं उठाया गया है। यदि हम बिहार को एक अविकसित राज्य कहते हैं, तो सीमांचल ( Simanchal ) का क्षेत्र देश के सबसे बुरे हलात में आता है, जहां लोग बुनियादी सुविधाओं के बिना जीवन जीने को मजबूर हैं।

सीमांचल

हमारे भारत का संविधान देश को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है, अपने नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का प्रदान करता है, और उनके बीच भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। भारत का संविधान सभी देशवासियों के लिए सामान रूप से लागू होती हैं। इसलिए, देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले किसी भी नागरिक के साथ राज्य’और केंद्र सरकारों द्वारा कोई अन्याय नहीं किया जा सकता है। लेकिन शायद सीमांचल के लिए यह सारी बातें लागु नहीं होता?

दोस्तो आपको यह बता दें की सीमांचल ( Simanchal ) के नाम पर एक ट्रैन की शुरुआत की गई है जिसका नाम ” सीमंचल एक्सप्रेस ” है जो जोगबानी और आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) के बीच चलती है। अधिक जानकारी जैसे टिकट की उपलब्धता, समय सरणी, रूट और बुकिंग की जानकारी आप हमारे इस पोस्ट को पढ़े के भी ले सकते हैं

सीमांचल की समस्याएं (Current Issues in Simanchal)

स्थानिय जायजा ले तो पता लगता है की बुनियादी सुविधाओं के विकास और उपलब्धता का अत्यधिक अभावो है। आजादी के बाद से ही भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में बड़े पैमाने पर अनदेखी की गई है। यहाँ विकसित भारत के सबसे बुरे हालातों को देखा जा सकता है। न तो चलने के लिए सड़क है और नहीं पढ़ाने के लिए शिक्षक।

सीमांचल ( Simanchal ), बिहार का यह क्षेत्र भारत के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में सुमार है और यह क्षेत्र अत्यंत गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, अस्वस्थ्य, दूषित पेय जल, जर्जर सड़क परिवहन के दौर से अब भी गुजर रहा है। अतः इसी विषय से सम्बंधित सीमांचल की समस्याओं के कुछ मुख्य उदाहरण मैं यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

1. निर्माणाधीन खाड़ी पूल का निर्माण कार्य अबतक पूरा नहीं किया गया।
2. Simanchal में कई नदी, नालों और कटे हुए सड़कों में पूल निर्माण कार्य का बोर्ड तो लग गया लेकिन काम अबतक शुरू नहीं हुआ
3. Simanchal में  पिछले साल भीषण बाढ़ से क्षेत्र के जर्जर हो गई सभी सडकों, पूल और पुलियों का निर्माण कार्य अब तक नहीं हुआ और न ही कोई जायजा लेने आया
4. सीमांचल ( Simanchal ) के महानंदा और कनकी नदी में बेसिन बनाकर नदी के धार को सीधा किया जाना था लेकिन दसक बीत गए कोई शोध लेने वाला नहीं है
5. सीमांचल ( Simanchal ) के नदियों के दोनों तरफ की रेतीली जमीनों में चायपत्ती की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता था लेकिन किसी ने इसकी बात तक नहीं की।
6. उद्योगों का निर्माण करक़े सीमांचल ( Simanchal ) केके युवकों का हरियाणा और पंजाब आदि स्थानों में पलायन को रोका जा सकता था, लेकिन किसी ने सोचा तक नहीं, कौन टेंशन ले भैया।
7. बिहार के सबसे कम प्रति व्यक्ति आये वाला क्षेत्र सीमांचल है , अतः आय को बढ़ाने की कोशिश कि जाय।
8. शिक्षा के क्षेत्र में सबसे पिछड़ा क्षेत्र सीमांचल ( Simanchal ) – स्कूल है पर शिक्षक नहीं, बायसी अनुमंडल में तो एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है, बैसा प्रखंड में मात्र तीन उच्च विद्यालय का होना जो बच्चों के लिहाज से बहुत काम है।
9. सीमांचल के बच्चों को इम्तिहान देने के लिए भी बहार जाना होता है अतः बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा संचालित माध्यमिक परीक्षा का केंद्र प्रखंड स्तर पर अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
10. स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे नाकामयाब क्षेत्र सीमांचल ( Simanchal ) – यहाँ लोगों के इलाज के लिए सरकारी डॉक्टरों की बहुत जयादा कमी है।
11. सीमांचल एम्बुलेंस, अग्निशमन और पानी की टैंकर की सुभीधा हर स्थानीय थाना में दी जनि चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ अब तक नहीं हुआ है।
12. सीमांचल ( Simanchal ) में आम जनता को स्वच्छ पेय जल की आपूर्ति सुनिश्चित अब तक नहीं कराई गई है।
13. सीमांचल के बहुत से गाओं में शौचालय निर्माण कार्यों अब तक शुरू नहीं कराइ गई है।
14. सीमांचल में स्वच्छता की व्यवस्था की हालत इतनी खकराब है के इस बारे में कुछ कहना ही बेकार है।
15. बिजली की लॉ वोल्टेज की समस्या सीमांचल ( Simanchal ) केके लगभग के गावोंवाले झेल रहे हैं।
16. जन वितरण प्रणाली (P.D.S.) की दुकानों में चावल और गेहूं का वितरण में इतनी धांधली है की खुल्लमखुल्ला डीलर माल को प्राइवेट में बेच देते हैं।
17. Simanchal में  पिछले साल आई भीषण बाढ़ के बाढ़ मुख्यमंत्री द्वारा बाढ़ राहत के लिए 9800/- रुपये घोषित करने के बाद 6000/- रुपये का देना और उस राशि से भी जन प्रतिनिधियों (विशेष कर वार्ड सदस्यों) के द्वारा अवैध वसूली करना आम जनता के लिए असहनीय था, लेकिन किसी ने कोई एक्शन नहीं लिया।
18. Simanchal में बैंक पदाधिकारी और CSP संचालकों द्वारा खाता लिंक नहीं करना और खाता लॉक कह कर भोले-भाले जनता से 200/- से 500/- रुपये तक का नाजायज़ तरीके से वसूल करना आम जनता के लिए असहनीय है और यह गौरख धंधा जोड़ों पर है, क्या प्रसासन इस मामले को ले कर भी आँखें बंद कर लिए हैं ।

Simanchal aur Purnea ka Itihas language & Issues Hindi me

चलिए बिहार के बारे में विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी भाग, जिसे Simanchal (सीमा क्षेत्र) कहा जाता है, जिसमें अररिया, कटिहार, किशनगंज, मधुपुरा, पूर्णिया और सुपौल शामिल हैं। यहां विश्व प्रसिद्ध शब्द जैसे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और स्वच्छता’, संचार और इसी तरह से निर्णय लेते हैं कि 1 9 47 में भारत की आजादी के बाद आम लोगों द्वारा राज्य या राष्ट्र के विकास को उचित रूप से देखा नहीं गया है। यदि हम बिहार को एक अविकसित राज्य कहते हैं, तो Simanchal का क्षेत्र देश के सबसे बुरे हिस्सों में आता है, जहां लोग बुनियादी सुविधाओं के बिना जीवन जी रहे हैं।

Simanchal aur Purnea ka Itihas language & Issues Hindi me

सीमंचल प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर एक नजर

सीमांचल ( Simanchal ) में कुल 9 जिले और 30% साक्षरता, जनसंख्या 2 करोड़, क्षेत्र – 20000 वर्ग किमी हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति प्रोफेसर पी के अब्दुल अज़ीस किशनगंज आने के बाद आश्चर्यचकित थे। उन्हों ने अपने बयान में कहा, मैं अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर सकता, की लोगों को बिना उचित कपड़े, बिना घरों, कच्चे और गंदे सड़क, पीने के पानी, एक अच्छा अस्पताल नहीं देखा। यहाँ लोग जीवन कैसे बिताते हैं। वह दक्षिण भारत से सम्बन्ध रखने वाला व्यक्ति सीमांचल के लोगों का दर्द महसूस कर सकते है, लेकिन बिहार सरकार और केंद्र इसके बारे में पूरी तरह से बेखबर है। स्थानीय राजनेताओं ने भी सीमंचल का दर्द नहीं समझा गया।

बिहार का संछिप्त परिचय , जिलों की लिस्ट , प्रशासन , कमिशनरी और आबादी

क्या हमें वास्तव में सीमांचल प्रदेश के नाम से अलग राज्य की आवश्यकता है?

मेरी माने तो किसी भी रूप से एक अलग राज्य बनाने या किसी विशेष क्षेत्र के नाम पर देश को विभाजित करना अच्छा विचार नहीं है। लेकिन सीमांचल ( Simanchal ) क्षेत्र के जिलों में स्थिति सबसे खराब है, और नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं और समृद्ध जीवन प्रदान करने के लिए सीमांचल को अलग पहचान की जरूरत है। बिहार 38 जिलों में शामिल एक बड़ा राज्य है, सभी विकास परियोजनाएं पटना से शुरू होती हैं, और जब फंड सीमांचल क्षेत्र तक पहुंच जाता है तो विकास की सीमा लगभग शून्य हो जाती है।

अतः सरकार को चाहिए की सीमांचल के इलाकों में विकाश में तेजी लाये और सीमांचल के लोगों को उनका हके दे नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब यहाँ भुकमरी और कुपषान आपने घर बना लेगा

Surjapuri Muslims demand reservation in jobs

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